

राजन सिंह चौहान
मनेंद्रगढ़/झगड़ाखांड:।शहर को बर्बादी की कगार पर धकेलने वाले सट्टा माफियाओं का काला चेहरा अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। कल तक जो शख्स चाय-समोसा बेचकर अपना गुजारा करता था, आज वह अरबों की काली कमाई के साम्राज्य पर कुंडली मारकर बैठा है। सूत्रों के मुताबिक, पंकज, उसका भाई और उनका सबसे वफादार गुर्गा ‘चंटी’, मिलकर पूरे शहर की जनता को आर्थिक रूप से कंगाल बनाने के मिशन पर निकल पड़े हैं।
6000 की नौकरी से अरबपति बनने का सफर
पंकज के अतीत का काला पन्ना खोलते हुए सूत्रों ने बताया कि कभी वह महज 6,000 रुपये की नौकरी एक पुराने सट्टा किंग के पास करता था, जहाँ उसका काम सट्टे की पर्चियों का हिसाब-किताब रखना था। अंकों की हेराफेरी के खेल में उसे ऐसी महारत हासिल हुई कि वह खुद इस अवैध साम्राज्य का बेताज बादशाह बन बैठा। आज पंकज के पास अरबों की संपत्ति है, जो सीधे तौर पर मासूम जनता की गाढ़ी कमाई को लूटकर बनाई गई है।
चंटी: सिंडिकेट का ‘खजांची’ और कलेक्शन मास्टर
इस पूरे गिरोह की रीढ़ ‘चंटी’ नाम का गुर्गा है। चंटी के पास शहर के हर छोटे-बड़े सट्टा पट्टी लिखने वालों का पूरा लेखा-जोखा रहता है। खबर है कि हर शनिवार शाम को चंटी अपनी काली बाइक पर सवार होकर पूरे शहर से सट्टे की उगाही करता है और लाखों रुपये अपने आकाओं (पंकज और उसके भाई) तक पहुँचाता है।
पंकज का भाई: पर्दे के पीछे का ‘सेकंड बॉस’
पंकज ने अपने भाई को इस अवैध धंधे का मुख्य रणनीतिकार बनाया है। जहाँ पंकज खुद को बचाने के लिए नए-नए पैंतरे चलता है, वहीं उसका भाई चंटी के जरिए पूरे नेटवर्क और पैसों के लेनदेन को नियंत्रित करता है। इन तीनों का एकमात्र उद्देश्य शहर की जनता की जेब खाली कर उन्हें सड़क पर लाना है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठते गंभीर सवाल
शहर में यह चर्चा जोरों पर है कि जो माफिया कल तक साइकिल खरीदने की हैसियत नहीं रखता था, वह आज लग्जरी गाड़ियों में कैसे घूम रहा है? क्या प्रशासन और जांच एजेंसियों को चंटी की काली बाइक और शनिवार के बड़े कलेक्शन की खबर नहीं है? मनेंद्रगढ़ और झगड़ाखांड की गलियों में अंकों का यह मायाजाल कई घरों के चूल्हे बुझा रहा है।
बड़ा सवाल: अब देखना यह है कि प्रशासन इन अरबपति लुटेरों पर ‘बुलडोजर’ चलाकर कार्रवाई करता है या फिर ये सट्टा माफिया इसी तरह शहर को खोखला करते रहेंगे।




